Dental book

रक्त - दाब blood pressure

रक्त - दाब या ब्लड प्रेशर हिंदी में।  


ब्लड प्रेशर एक ऐसा प्रेशर है जो आर्टरी का प्रेशर है। 
यहाँ आर्टरी को अगर एक टुबे की तरह समझा जाये तो जब रक्त आर्टरी में बहेगा तो एक प्रेशर आगे की तरफ होगा और एक प्रेशर आर्टरी की दीवारों पर होगा। 


यह प्रेशर जो दीवारों पर पड़ता है इसे कहतें है ब्लड प्रेशर।  तो अगर इसकी परिभाषा हुईपार्श्विक प्रेशर जो रक्त आर्टरी की दीवेयरों पर डालता है जॉब वह रक्त उस आर्टरी में में पाया जाताहै।

ब्लड प्रेशर होना इस लिए अनिवार्य है
. ताकि रक्त कपिलरीज़ से टिश्यू में जा पाए और ऑक्सीजन, ग्लूकोस  जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व टिश्यू को दे पाए।          
. प्रेशर होए की वजह से रक्त सरे सिस्टम और ऑर्गन्स में पहुँच पता है।  
यूरिन या मूत्र बन सके, किडनी में रक्त का फिल्ट्रेशन या छाना जाता है जो रक्त से बनता है ।  
. लिम्फ के बनने के लिए जयररि है।  


प्रकार:

1 . सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर :
 जॉब वेंट्रिकल्स में सिस्टोले होता है ताब  ज्यादा से ज्यादा प्रेशर जो बनता है उसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते है। सिस्टोलिक  का सामान्य परिसर१०० से १३९ mmHg है।  मध्यम मात्र १२० mmHg है। यह ह्रदय कितनी जोर से दाबत है उस पर निर्भर होती है।   

डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर
यह प्रेशर जो वेंट्रिकल्स रिलैक्स या दइआलाते होने पार सबसे काम प्रेशर पयेजने वाले प्रेशर को कहते हैं।  इस में सबसे काम बदलाव होती है। यह छूटे आर्टरीज जिसे आर्टेरियल्स कहते हैं उस पर निर्भर करता है।    सामान्य परिसर : 70-90 mmHg,  मध्यम मात्र इसकी  80 mmHg है।  

. पल्स प्रेशर :
सिस्टोलिक और डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर के के बीच अंतर को कहते हैं।  अगर सिस्टोले 120 लें और दिअस्तोल 80  फिर 120 - 80 = 40 mmHg. 

4. मीन आर्टेरिअल प्रेशर
सामान्य या मीन प्रेशर जो कार्डियक साइकिल के दोहरन पाया जाता है।  अगर  वेंट्रिकल्स के सिस्टोले 0.3 सेकंड्स है और डायस्टोल 0.5 सेकण्ड्स है फिर यह दोनों बराबर तो नहीं हुए इसलिए इसका फार्मूला है 


  पल्स प्रेशर + 1/3 डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर। 
ब्लड प्रेशर को स्थानीय संतुलन बनाने में बरोरेसेप्टर और कीमो रिसेप्टर बहुत  महत्वपूर्ण हैं।  

फिजियोलॉजिकल परिवर्तन:


१. उम्र : ब्लड प्रेशर उम्र के साथ बढ़ता रहता हो, बचूं में बहुत काम 65-115/42-80 mm Hg, 7 साल  : 87-177/48-64 mmHg, बालिग : 120/80 mmHg  


२. शरीर का आकार: बड़े लोगों और बचे में ज़्यादा पाया जाता है।


३. स्ट्रेस : स्त्री , घबराहट, गुस्सा होने से जिसके वजह से ब्लड प्रेशर ज्यादा हो जाता है।


४. तिर्यक भेद: ब्लड प्रेशर रात को या शाम को बढ़ जाता है और सुबह उठने पर काम पायाजाता है।




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