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हाइपोक्सिया क्या है

यहाँ पर इन प्रश्नो के उत्तर मिलेंगा :
हाइपोक्सिया क्या होता है ,
हाइपोक्सिया के कितने प्रकार होते हैं,
हाइपोक्सिया के क्या लक्षण होते है।


हाइपोक्सिया



अगर किसी भी कारण से मानव शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो उसके वजह से टिश्यू अपना

काम नहीं कर पाएंगे ।  टिशूज में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है और सेल अपने मेटाबोलिज्म फंक्शन्स

नहीं कर पायेगा, इसे हाइपरक्सिया कहते हैं। अगर कोई अंग या पूरे शरीर में ऑक्सीजन की  कमी हो जाए

तभी भी वह हाइपरक्सिया कहलाता है।
इसके कारण अनेक है। अगर आप ऊंची चढ़ाई चढ़ते हैं, हिमोग्लोबिन कम है, ऑक्सीजन की सप्लाई कम है

जैसे बंद कमरे में अगर आप बैठे हो, फेफड़ों की बीमारी, खून की बीमारी आदि।
प्रकार:
१.  ह्य्पोक्सिक हाइपोक्सिया
ह्य्पोक्सिक हाइपोक्सिया  को आर्टिरियल हाइपरक्सिया कहते हैं। 
जब आसपास के वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाए। यहां पर ह्य्पोक्सिक हाइपोक्सिया देखने को मिलता है।
क्योंकि ऑक्सीजन की कमी हुई है, इसके वजह से लंग्स  में ऑक्सीजन का प्रेशर कम हो जाता है।


ऑक्सीजन का कंटेंट कम हो जाता है। उसकी वजह से हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन जो रक्त में मिला होता है 

दोनों का मिलना कम हो जाता है। इसके कारण अगर आप ऊंची चढ़ाई पर हैं या बंद कमरे में सांस ले काफी

समय तक या अगर आप ऐसी गैस से सांस ले रहे हैं जिसमें ऑक्सीजन कम हो तब भी यही ह्य्पोक्सिक
हाइपोक्सिया मिलता है। 

और कारन जैसे अस्थमा, ब्रेन ट्यूमर, नीमोथोरेक्स, लंग फाइब्रोसिस या फिर हार्ट फेलियर पाया जाता है।
यहां पर हिमोग्लोबिन की फंक्शन ठीक रहेगी। टिशूज की ऑक्सीजन इस्तेमाल करने की क्षमता ठीक रहेगी
और ब्लड फ्लो भी बॉडी में ठीक रहेगा।

२. एनीमिक हाइपरक्सिया: 
एनीमिया का मतलब है जब ऑक्सीजन उठाने की कैपेसिटी हीमोग्लोबिन की कम हो जाती है।
जहां पर वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा में है, खून की फ्लोर बिलकुल  सही रफ्तार से चल रही है।



टिशूज अपना काम ठीक से कर पा रहे हैं। लेकिन हीमोग्लोबिन अपना काम ठीक तरह नहीं कर पा रहा है।
-इसके कारण हो सकते हैं अगर आरबीसी की मात्रा कम हो जाए।
 -हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाए।
 -अगर हीमोग्लोबिन बदल जाए। 
 -हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के अलावा दूसरे गैसेस से मिल जाए।
यहां पर ऑक्सीजन वातावरण में  सही मात्रा में मिलेगा लेकिन हिमोग्लोबिन और ऑक्सीजन का मेल हमें कब

मिलेगा इसकी वजह से ऑक्सीजन कंटेंट खून में कम हो जाएगा।
लेकिन याद रहे तिसुएस सही काम कर पराहें हैं और रक्त बहने की डाक्टर ठीक है।  
३. स्टैग्नेंट हाइपरक्सिया:
यहां पर स्टैग्नेंट का मतलब है खड़ा रहना या खून का बहाव यहां पर धीमा हो जाता है,  लगभग रुक जाता है।

इसकी वजह से आपको स्टैगनैंट हाइपरक्सिया दिखता है लेकिन बाकी सारी चीजें ठीक रहेंगे जैसे वातावरण में

ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होगी, हीमोग्लोबिन अपना काम ठीक कर पाएंगे, टिश्यू की काम करने की

क्षमता ठीक रहेगी ।
इसके कारण है
- हार्ट फैलियर
 -ब्लड लॉस।
यहां पर। ऑक्सीजन का पार्सल प्रेशर, नॉर्मल मिलता है ऑक्सीजन कंटेंट आर्टिरीज में नॉर्मल मिलेगा,

ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन आर्टिरीज में नॉर्मल मिलेगा लेकिन ऑक्सीजन कंटेंट वेइन्स  में कम मिलेगा।

क्योंकि धीरे बहने की वजह से वहां पर टिशूज ज्यादा ऑक्सीजन उठा लेते हैं । 

४. हिस्टोटॉक्सिक हाइपरक्सिया:
 हिस्टोटॉक्सिक हाइपरक्सिया हुआ अगर कोई भी ऐसा जहर जो टिशूज को खराब करते है  जिसकी वजह से

वह अब ऑक्सीजन का इस्तेमाल ना कर पाए।
जैसे सायनाइड प्वाइजनिंग।
यहां पर वातावरण में ऑक्सीजन सही रहेगा, हीमोग्लोबिन सही काम कर पा रहा है, खून का बहाव भी सही है।
क्योंकि यहां पर टिशूज ऑक्सीजन को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह से आर्टिरीज और वेइन्स की

ऑक्सीजन में बहुत ही कम फर्क लगेगा ऑक्सीजन की मात्रा दोनों में लगभग एक सामान मिलेगी ।

संकेत और लक्षण : 
त्वचा :

कलर में   बदलावट हो सकती है जो नीले से लाल हो सकता है।  
हाइपोक्सिया  होने से सांस लेने की रफ्तार तेज हो जाएगी जिसे तचयकपनोया  कहते है ।
खांसी, छाती में जकड़न, घरघराहट आदि ।
सीएनएस:
सर में चक्कर घबराहट, सर दर्द शिकायत हो सकती है।
ज्यादा बोलना, अजीब हरकतें करना जैसे हंसना, चिल्लाना और रोना आदि भी आपको दिख सकता है।
स्वस: 
हृदय में आपको  हृदय का रेट या रेट बढ़ा हुआ मिलेगा सांस के साथ, ब्लड प्रेशर बढ़ा मिल सकता है । 

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