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ब्लड प्रेशर का संगठन

ब्लड प्रेशर का संगठन:
रक्त के बहने के लिए उसके संगठन को समाज न जरूरी है।
इसे कुछ प्रकार में बता जाता है :

१. विंडकेसेल:
 इनहै डिस्टेंसिबले आर्टरीज भी कहा जाता है , जो बड़ी आर्टरीज होती हैं जैसे एओर्टा, पल्मोनरी आर्टरी, जब रक्त हृदय से निकलता है तब वह बहुत हाई प्रेशर से निकलता है जिसकी वजह से वहां आर्टरीज को मज़बूत होना आवश्यक है।  उसके साथ इन आर्टरीज में इलास्टिक फिबेर्स ज्यादा पायी जाती हैं। जो ब्लड फ्लो को पल्सटिले से स्ट्रीमलाइन बनदेति हैं।

     मतलब जॉब हार्ट कॉन्ट्रैक्ट करता है तब रक्त बहार निकालके एक ही बहाव में निकालता लेकिन उस वक्त एओर्टा चौड़ी होजाती है जिसके कारन एक्स्ट्रा या ज्यादा रक्त एओर्टा मैं रहजाता है , और फिर जॉब हृदय रिलैक्स करता है तब एओर्टा सिकुड़ती है तो जो एक्स्ट्रा रक्त था वह वहां से बह जाता है।  इसलिए ब्लड फ्लो निरंतर बानी रहती है जिसे स्ट्रीमलाइन फ्लो कहा जाता है।  इस इफ़ेक्ट को विंडकेसेल इफ़ेक्ट कहा जाता है।

२. रेजिस्टेंस वेसल:
रेजिस्टेंस मतलब विरोध, यह आर्टरी ब्लड फ्लो का विरोध करके ब्लड फ्लो का संतुलन बनती हैं।  यह ब्लड वेसल कपिलरीज़ की ब्लड फ्लो को मेन्टेन करती हैं , जिसकी वजह से रक्त टिश्यू में सही दबाव के साथ जा पाता है।

इसमें आर्टेरियल्स जो छोटी आर्टेरिरस होती हैं , मेटा आर्टेरियल्स , प्रकापिल्लरी स्पिच्नक्टेर्स होती हैं।  यह सरे डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर का संतुलन बनती हैं।  जब ब्लड फ्लो ज्यादा होती है तो आर्टेरियल्स, प्रकापिल्लरी स्फिंक्टर्स सिकुड़ जाती है फिर ब्लड फ्लो कपिलरीज़ में काम होजायेगा, वहीं कम  फ्लो की वजह से उल्टा इफ़ेक्ट मिलता है।

इन साब से नुट्रिएंट का एक्सचेंज होना या अदलाबदली होना निर्भर होता है , चेहे वह ऑक्सीजन, ग्लूकोस हो या कार्बन डाइऑक्साइड , लैक्टिक एसिड , हाइड्रोजन आयन हो।  यह आर्टेरियल्स काम इलास्टिक होती है पर कई मस्कुलर होती है(मांसल), जिसके वजा ह से यह सिकुड़ या चौड़ी हो जाती हैं।   

३. एक्सचेंज वेसल्स :

यहाँ वेसल का सबसे बड़ा कार्य है नुट्रिएंट्स को टिश्यू में देना और उपयोग करि हुई चीज़ों को हटाना।  इस कराया के लिए कपिलरीज़का एहम उपयोग है।  क्योंकि इनकी दीवार एक ही परत से बानी है, जिसमे भी काफी अंतर बीच में पाए जाते हैं।  इसके वजह से काफी नुट्रिएंट्स अदलाबदली हो पते हैं।

४. कपसिटंस वेसल्स :
रक्त काफी होने की वजह से और ब्लड प्रेशर को मेन्टेन करनेकेलिए  काफी रक्त वेइन्स में स्टोर हो जाता है।  वेइन्स,  वेनुल्स जो इनके छोटे साइज वेइन्स हैं  इस काम को करे हैं।  इनकी दीवार काम मस्कुलर होती है और इसमें इलास्टिक टिश्यू भी काम पाया जाता है।

५. शंट वेसल:

कई जगह पर आर्टरी की सप्लाई डायरेक्टली वेइन्स की सप्लाई से मिलजाती है।  मतलब आर्टरी --> मेटार्टरियल्स --> वेनुल्स  और खून सीधा वेइन्स में चले जाता है।  इन्हे अटरिओ - वेनस अनस्टेमोसिस कहा जाता है।
इसका उद्देश्य है की खून की गर्मी को जाने नहीं देते, अगर रक्त कपिलरीज़ में जाता तो तो वहां से गर्मी खून की वातावरण फेल जाती।  इसलिए गर्मी मैं यह चढ़े हो जाते हैं और रक्त इनमें ज़्यादा  बहता  है और गर्मी भी निकल जाती है। 

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